Pages

Subscribe:

Ads 468x60px

test ad

Featured Posts

  • Blockquote

    Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipisicing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua...

  • Duis non justo nec auge

    Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipisicing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua...

  • Vicaris Vacanti Vestibulum

    Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipisicing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua...

नील गगन पर चमकें तारे

नील गगन पर चमकें तारे
-प्रत्‍यूष गुलेरी

नील गगन पर चमकें तारे।
सुंदर सुंदर प्‍यारे प्‍यारे।।

कभी दीखते ढ़ेरों सारे।
लगते करते खूब इशारे।।

चंदा के संग चलते रहते।
सर्दी गर्मी सहते रहते।।

भाता इनको आना जाना।
आँख झपकते झट छिप जाना।।

आँगन में हम खाट बिछाए।
देखा करते दूध नहाए।।

कठिन बड़ा है इनको गिनना।
इनसे न हो सकता मिलना।।

...मानो चली छानकर भंग।

पतंग
-अश्‍वनी कुमार पाठक

नीली-पीली, लाल पतंग, उड़ती है बादल के संग।
नभ में मस्‍ती से लहराती, मानो चली छानकर भंग।

नीचे आती, गुटके खाकर, उठ जाती है, फिर सन्‍नाकर।
दाएँ-बाएँ शीश झुकाकर, ढील मिली चढ़ जाती चंग।

मोनू-सानू जल्‍दी आओ, सद्दी में मंझा लगवाओ।
चरखी में चढ़वा लो धागा, आज पतंगों की है जंग।

नीचे के काने में पुच्‍छी, और बीच में हो गलमुच्‍छी।
इससे सीखो ऊँचा उठना, इसके बड़े निराले ढंग।।

दिन सहमे-सिकुडे से लगते, रातें बडी लड़ैया....

जाड़े आये 

दिन सहमे-सिकुडे से लगते,
रातें बडी लडैया...
जाड़े आये भैया।

खींच-खींच सूरज की चादर,
रजनी पाँव पसारे।
काना फूँसी करें उघारे,
थर्..थर्..चन्दा-तारे।
धूप बेचारी ...हारी,
करती जल्दी गोल बिछैया...
जाड़े आये भैया।

लदे फदे कपडों में निकलें,
चुन्नू-मुन्नू भाई।
मम्मी के हाथों में नाचे,
दिन भर ऊन-सलाई।
किट्-किट्..करते दाँत,
कंठ से सी...सी दैया--दैया।
जाड़े आये भैया।

दुश्मन लगता ठण्डा पानी,
दोस्त है धूप सुनहली.
देर रात बैठे अलाव पर,
करते यादें उजली।
लगें अजनबी से अब तो,
ये नदिया ताल तलैया...।
जाड़े आये भैया।
अमरूदों ने मीठी-मीठी 
खुशबू है फैलाई।
गोभी, गाजर, मटर, टमामर 
ने बारात सजाई ।
गन्ने हो गये रस की गागर,
सरसों भूल-भुलैया...
जाड़े आये भैया।

खेलो, खालो, पढ लो सो लो,
अब तुम जी भर-भऱ के,
कोई काम करो मत भैया,
घबरा के डर-डर के ।
---सर्दी लग जायेगी ---कहते,
हारे बेशक मैया।
जाड़े आये भैया।

जूते की पुकार...

जूते की पुकार
रमेश तैलंग


फट गया हूं मैं तले से, कट गया हूं मैं गले से
लद गया मेरा जमाना, हो गया हूं अब पुराना
आ पड़ी है जान पर, रुकने लगे सब काम मेरे
हो कहां, मेरी खबर लो अब तो मोचीराम मेरे!

एक बूढ़े दादा जी हैं, छोड़ते मुझको नहीं हैं
थक गया हूं रोज कहकर, चल रहा हूं बस घिसटकर
व्यर्थ ही, लगता, गए सब मिन्नतें, 'परनाम' मेरे
हो कहां, मेरी खबर लो अब तो मोचीराम मेरे!

ऑपरेशन की जरूरत, है यही बचने की सूरत
देर कर दी और थोड़ी, जान जायेगी निगोडी
वो कबाड़ी भी न देगा चार पैसे दाम मेरे
हो कहां, मेरी खबर लो अब तो मोचीराम मेरे!

अब नहीं मैं दूध पीता एक बच्‍चा...

 
माँ समझती क्यों नहीं है?
- रमेश तैलंग 

अब नहीं मैं दूध पीता एक बच्चा 
माँ समझती क्यों नहीं है?
 
 
चाहता हूं, मैं बिताऊं वक्त ज्यादा 
दोस्तों के बीच जा कर,
चाहता हूं, मैं रखूँ दो-चार बातें 
सिर्फ अपने तक  छुपाकर,
 
पर मेरे आगे से डर की श्याम छाया
दूर हटती क्यों नहीं है ?
 
छोड़ आया हूं कभी का बचपना, जो
सिर्फ जिद्दी, मनचला था,
हो गया है अब बड़ा सपना कभी जो
थाम कर उंगली चला था,
 
पर बड़ों की टोका-टोकी वाली आदत 
क्यों, बदलती क्यों नहीं है?