बताशे पानी के
-सुंदरलाल अरूणेश-
मजेदार लगते हैं कितने यार, बताशे पानी के।
देता लच्छूराम रूपये में चार बताशे पानी के।
इनका पानी याद करो, तो मुँह में भर आता पानी,
इन्हें गोलगप्पा भी कहते, सूरत जानी पहचानी।
इसीलिए पाते हैं सबका प्यार, बताशे पानी के।
थोड़ी मिली खटाई इसमें, खुश्बूदार मसाला है,
टिक्की, खस्ता से भी बढ़कर इनका स्वाद निराला है।
पापड़ जैसे कड़क कुरमुरे यार बताशे पानी के।
देर नहीं लगती है, मुँह में रखते ही ये घुल जाते,
देर नहीं लगती है, मुँह में रखते ही ये घुल जाते,
कभी कभी मम्मी पापा भी इन्हें देखकर ललचाते।
खाओ भी चटपटे जायकेदार बताशे पानी के।














