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तितली रानी


तितली रानी, तितली रानी
पंख उड़ाती कहाँ चली ?

घूम रही हो गली - गली
अभी यहाँ थी, वहाँ चली

काश हमारे भी पंख होते
संग तुम्हारे हम उड़ लेते

रंग - बिरंगे पंख तुम्हारे
मन को भाते हैं ये सारे

जब भी तुमको चाहें छूना
पास नहीं आती हो

फूलों का रस लेकर
झट से उड़ जाती हो।

-आकांक्षा यादव