हिन्दी ब्लॉगर्स अवार्ड

"संवाद डॉट कॉम" द्वारा 20 श्रेणियों में दिये जाने वाले 2009 के श्रेष्ठ ब्लॉगर्स सम्मान की घोषणा प्रारम्भ हो चुकी है।

बाल कविता- नन्‍ही मुनिया छुई-मुई

नन्‍ही मुनिया छुई-मुई।

दिन भर तितली जैसी उड़ती, घर आँगन चौबारे में।

मुँह बिचकाती, खूब हंसाती, करती बात इशारे में।

मम्‍मी अगर जरा भी डांटें, रोने लगती उई-उई।


रोज सवेरे चार जलेबी, बड़े चाव से खाती है।

चीनी वाला दूध गटागट, दो गिलास पी जाती है।

दूध-जलेबी ना हो, समझो, आज मुसीबत खड़ी हुई।।


दादी के कंधे चढ़ जाती, कहती चल रे चल घोड़े।

टिक-टिक दौड़ लगा दे जल्‍दी, वरना मारूँगी कोड़े।

दादी उसको पुचकारें तब-चल नटखट, शैतान, मुई।।

-डा0 फहीम अहमद

<चित्र साभार http://www.sostav.ru/

बाल कविता- मेरा भरो टिफिन



बहुत खा चुका टोस्‍ट, पकौड़े, आलू भरे परांठे।

ऊब गया जी मेरा अब तो, इनको खाते-खाते।।


खीर मलाई, तिल का लडडू, कब से नहीं है खाया।

मक्‍के की रोटी खाने को भी है मन ललचाया।।


शहद में चुपड़ी रोटी या फिर दूध जलेबी खाऊं।

कितना अच्‍छा लगता मटठा, आखिर कैसे पाऊं??


मूंगफली की पपड़ी खाऊं, हलवा मेवे वाला।

दूध में भीगे मीठे चावल का है स्‍वाद निराला।।


नहीं चाहिए मुझको पिज्‍जा, बर्गर, चाऊमिन।

मुंहमॉंगी चीजों से मम्‍मी, मेरा भरो टिफिन।।


-डा0 फहीम अहमद


बाल कविता- चुन्नू चला स्कूल



नटखट गोलमटोल सा
लिए हाथ में रुल।
लिये पीठ पर बस्‍ता

चुन्नू पहुंचा स्कूल।।

एक हाथ में थर्मस थामे
दूजे में थी टाफी।
ब्रेड और जैम टिफिन में रखा
उतना ही था काफी।

नये दोस्‍त नये सहपाठी
धमाचौकडी, मस्ती

घर लौटे चुन्नू को देख
मम्मी उसकी हँसती।।

-रवि प्रकाश केशरी
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