
काना बाती कुर्र
-कुँअर बेचैन -
अरी चिरइया नींद की, हो जा जल्दी फुर्र।
काना बाती कुर्र।
छोड़ अपने आराम को, सूरज निकला काम को,
देकर सबको रोशनी, घर लौटेगा शाम को।
तू भी जल्दी छोड़ दे खर्राटों की खुर्र।
काना बाती कुर्र।
जगीं शहर की मंडियॉं, गॉंवों की पगडंडियॉं,
खेतों ने भी दिखलाईं हरी फसल की झंडियॉं।
चली सड़क पर मोटरें, घर घर घर घर घुर्र।
काना बाती कुर्र।
-कुँअर बेचैन -
अरी चिरइया नींद की, हो जा जल्दी फुर्र।
काना बाती कुर्र।
छोड़ अपने आराम को, सूरज निकला काम को,
देकर सबको रोशनी, घर लौटेगा शाम को।
तू भी जल्दी छोड़ दे खर्राटों की खुर्र।
काना बाती कुर्र।
जगीं शहर की मंडियॉं, गॉंवों की पगडंडियॉं,
खेतों ने भी दिखलाईं हरी फसल की झंडियॉं।
चली सड़क पर मोटरें, घर घर घर घर घुर्र।
काना बाती कुर्र।








