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फूल बनकर मुस्कराना चाहिए


-रोहिताश्व अस्थाना

जिंदगी हंसकर बिताना चाहिए।
चुटकुले सुनना-सुनाना चाहिए।

रात-दिन आँसू बहाने से भला,
फूल बनकर मुस्कराना चाहिए।

चाट का ठेला खड़ा है सामने,
आज कुछ खाना-खिलाना चाहिए।

आ गया इतवार, पापा जी हमें,
आज तो सरकस घुमाना चाहिए।

एक सीमा तक करें शैतानियाँ,
ना किसी का दिल दुखाना चाहिए।

मास्टरजी हम पढ़ेंगे शौक से,
पर खिलौने कुछ दिलाना चाहिए।

देश को खुशहाल रखना है अगर,
हमको संसद में बिठाना चाहिए।

देख खुली कमरे की खिड़की, चुपके से घुस आती है।


- संभव शर्मा -


यह ठण्डी जब आती है
हमको बहुत सताती है


सूरज से पर डरती है,
देख उसे छुप जाती है।


हवा सहेली पक्की है,
उसके संग इठलाती है।



पानी के संग मिलकरके,
काट हमें वह खाती है।


देख खुली कमरे की खिड़की,
चुपके से घुस आती है

माँ से उसकी बड़ी दुश्मनी,
कम्बल, टोप उढ़ाती है

किताबें कुछ कहना चाहती हैं, तुम्हारे पास रहना चाहती हैं।


-सफदर हाशमी-


किताबें कुछ कहना चाहती हैं
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं।

 
किताबें करती हैं बातें
बीते ज़मानों की
दुनिया की, इंसानों की
आज की, कल की
एक-एक पल की।
ख़ुशियों की, ग़मों की
फूलों की, बमों की
जीत की, हार की
प्यार की, मार की।
क्या तुम नहीं सुनोगे
इन किताबों की बातें ?

किताबें कुछ कहना चाहती हैं।
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं।
किताबों में चिड़िया चहचहाती हैं
किताबों में खेतियाँ लहलहाती हैं
किताबों में झरने गुनगुनाते हैं
परियों के किस्से सुनाते हैं
किताबों में राकेट का राज़ है
किताबों में साइंस की आवाज़ है
किताबों में कितना बड़ा संसार है
किताबों में ज्ञान की भरमार है।

क्या तुम इस संसार में
नहीं जाना चाहोगे?
किताबें कुछ कहना चाहती हैं
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं।