डॉ0 सुरेश उजाला के हाइकु
-
हुई खिन्नता
व्यक्ति-व्यक्ति में देख
भेद-भिन्नता।
भू पे आकर
पढ़े कबीर सिर्फ
ढ़ाई आखर।
पाते ही मौका
इंसान ने त्वरित
दिया है धोखा।
रहा है बेल
चकले पे आद...
ये है एक साहित्यकार की जिजीविषा...
-
हो
सकता है कि आपने इंदरमन ‘साहू’ के बनाए हुए व्यंग्य-चित्र देखे हों, उनकी बाल कहानियाँ पढ़ी हों या
फिर उनके द्वारा सम्पादित बाल पत्रिका ‘बाल
मितान’ देखी ह...
2 weeks ago
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डॉ0 सुरेश उजाला के हाइकु
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हुई खिन्नता
व्यक्ति-व्यक्ति में देख
भेद-भिन्नता।
भू पे आकर
पढ़े कबीर सिर्फ
ढ़ाई आखर।
पाते ही मौका
इंसान ने त्वरित
दिया है धोखा।
रहा है बेल
चकले पे आद...
ये है एक साहित्यकार की जिजीविषा...
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हो
सकता है कि आपने इंदरमन ‘साहू’ के बनाए हुए व्यंग्य-चित्र देखे हों, उनकी बाल कहानियाँ पढ़ी हों या
फिर उनके द्वारा सम्पादित बाल पत्रिका ‘बाल
मितान’ देखी ह...
हिन्दी चिट्ठों पर सांप... अविनाश वाचस्पति।
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लिगेसी इंडिया, मार्च 2012 में अविनाश वाचस्पति जी द्वारा ब्लॉग की चर्चा।
अगर आपको 'सर्प संसार' का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह...
1 टिप्पणियाँ:
bahut acchi balkavita hai tom and jerry hindi me acchi lagi...
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